भोपाल: प्रदेश में बेटियों के घर से गायब होने की बढ़ती घटनाओं के पीछे सबसे बड़ी वजह पारिवारिक नाराजगी सामने आई है। पुलिस मुख्यालय की वर्ष 2025 की विश्लेषणात्मक रिपोर्ट बताती है कि 43 प्रतिशत बालिकाएं गुस्से या घर के माहौल से असंतुष्ट होकर स्वयं घर छोड़कर चली गईं। इसके अलावा प्रेम संबंध, आर्थिक तंगी और अन्य सामाजिक कारण भी इसके पीछे जिम्मेदार हैं। हालांकि पुलिस ने पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक बालिकाओं को वर्ष 2025 में खोजा है, फिर भी 2600 से अधिक अब भी लापता हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में खोजी गई 14,520 बालिकाओं में से करीब 43 प्रतिशत ने स्वीकार किया कि वे परिवार से नाराज होकर घर छोड़कर गई थीं। वहीं, 18 प्रतिशत ने बताया कि वे अपने प्रेमी के साथ चली गई थीं। यह आंकड़ा बताता है कि पारिवारिक संवाद की कमी और भावनात्मक तनाव बालिकाओं के लिए बड़ा जोखिम बन रहा है।
अपराध नहीं, सामाजिक समस्या भी
अब तक बालिकाओं के गुम होने को अधिकतर अपराध के नजरिये से देखा जाता रहा है, लेकिन पुलिस की बातचीत में आर्थिक और सामाजिक पहलू भी सामने आए हैं। वर्ष 2025 में खोजी गई बालिकाओं में से 406 ने कहा कि वे आर्थिक तंगी के कारण घर छोड़कर गई थीं। लगभग एक प्रतिशत बालिकाएं पढ़ाई के लिए स्वयं चली गईं, जबकि डेढ़ प्रतिशत ने रास्ता भटकने की बात कही, हालांकि पुलिस इन दावों की पुष्टि नहीं मान रही।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़े
पिछले पांच वर्षों में कुल 58,403 बालिकाएं गुम हुईं, जिनमें से 55,803 को खोज लिया गया है। वर्ष 2021 में 9,407, 2022 में 9,093, 2023 में 11,250, 2024 में 11,907 और 2025 में 13,146 बालिकाएं गुम हुई थीं। इनमें वर्ष 2025 में सबसे अधिक बालिकाएं खोजी गईं, फिर भी 2600 से ज्यादा अब भी लापता हैं।
संवाद और सहयोग की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि बेटियों से संवाद बढ़ाकर, पारिवारिक तनाव कम कर और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराकर इन घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। पुलिस भी मानती है कि सामाजिक जागरूकता और परिवारों की भूमिका इस दिशा में निर्णायक हो सकती है।
















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