ग्वालियर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने अपील में देरी को माफ कर अपील को बहाल करते हुए एक सकारात्मक संदेश दिया। अदालत ने आवेदक के अधिवक्ता को सुझाव दिया कि वे माधव अंधाश्रम ग्वालियर जाकर दिव्यांग बच्चों और वहां रह रहे लोगों के साथ एक घंटा समय बिताएं और लगभग 3,500 रुपये के खाद्य पदार्थ साथ ले जाएं।
समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर
कोर्ट ने साफ कहा कि यह कोई सजा नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का अवसर है। अधिवक्ता ने कोर्ट के इस सुझाव को खुशी-खुशी स्वीकार किया और 15 दिनों के भीतर आश्रम जाकर रिपोर्ट देने का भरोसा दिया।
अपील दायर करने में हुई 156 दिनों की देरी
कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट मिलने के बाद पहली अपील को पूरी तरह बहाल कर दिया जाएगा। साथ ही इस आदेश की जानकारी महिला व बाल विकास विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और किशोर न्याय समिति को भी दी जाएगी।
हाई कोर्ट ने अपील दायर करने में हुई 156 दिनों की देरी को लेकर यह आदेश न्यायमूर्ति आनंद पाठक व माननीय न्यायमूर्ति अनिल वर्मा ने नौ जनवरी को दिया।
अधिवक्ता की भूल के कारण पक्षकार को नुकसान नहीं होना चाहिए
मामला मिलेंद्र शर्मा बनाम श्रीमती राखी शर्मा से जुड़ा है। आवेदक की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि तकनीकी कारणों और अनजानी गलती की वजह से समय पर जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जिसके कारण पहले अपील खारिज हो गई थी। कोर्ट ने माना कि यह गलती जानबूझकर नहीं थी और अधिवक्ता की भूल के कारण पक्षकार को नुकसान नहीं होना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने देरी को माफ कर दिया।
















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