चंडीगढ़ : कभी हरियाली और साफ-सुथरे वातावरण के लिए जाना जाता चंडीगढ़ अब गंभीर प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है। पी.जी.आई. स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर डा. रविंदर खैवाल ने हालिया रिपोर्ट में कहा है कि शहर की हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ रही है। यह सिर्फ़ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि एक बढ़ती हुई पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी है। डा. खैवाल के अनुसार, साल 2020 में चंडीगढ़ ने 121 दिन अच्छी हवा वाले दर्ज किए थे, जबकि साल 2024 तक यह संख्या घटकर सिर्फ़ 22 दिन रह गई। पिछले साल ही 91 दिन ‘खराब से बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज हुए, जिनमें पहली बार गंभीर स्तर का प्रदूषण भी देखा गया।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
प्रदूषण का असर बच्चों, बुज़ुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों पर सीधे पड़ रहा है। डा. खैवाल के मुताबिक, प्रदूषण दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, श्वसन संबंधी समस्याओं, शुगर और मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अब छोटे-छोटे कदम पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि बड़े और विज्ञान-आधारित बदलाव की आवश्यकता है।
गैर-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा दें
डा. खैवाल ने कहा कि मोबाइल ऐप्स जैसे समीर एप्प नागरिकों को प्रदूषण की रिपोर्ट करने का अवसर देते हैं, लेकिन अभी इसका इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लोग कम वाहन चलाएं, कूड़े का सही तरीके से निपटान करें और साइकिल जैसी गैर-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा दें। डा. खैवाल ने स्पष्ट कहा कि चंडीगढ़ के प्रदूषण को सिर्फ़ शहर-विशेष नीति से नहीं, बल्कि मोहाली और पंचकूला सहित पूरे ट्राईसिटी क्षेत्र के साथ मिलकर रणनीति बनानी होगी। उन्होंने कहा कि सड़कों की गुणवत्ता सुधारना, टायर भरना, धूल घटाना और ग्रीन ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना जरूरी है।
















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