भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य साइबर पुलिस ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के शिकार लोगों को बड़ी राहत देते हुए ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) की समयसीमा में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब एक लाख रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड मामलों में दर्ज ई-जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में बदलने के लिए पीड़ितों के पास 30 दिनों का समय होगा। इससे पहले यह अनिवार्य प्रक्रिया महज तीन दिनों के भीतर पूरी करनी पड़ती थी।
व्यस्तता और दूरी को देखते हुए लिया निर्णय
अक्सर देखा गया है कि रोजमर्रा की व्यस्तताओं या तकनीकी कारणों से पीड़ित तीन दिन के भीतर थाने नहीं पहुंच पाते थे, जिससे कानूनी प्रक्रिया बाधित होती थी। इसी समस्या को देखते हुए राज्य साइबर पुलिस ने अवधि बढ़ाकर 30 दिन कर दी है। अब संबंधित थाना स्टाफ पीड़ित को नोटिस जारी कर बुलाएगा, ताकि वे अपनी सुविधा अनुसार निर्धारित समय में ई-जीरो एफआईआर को रेगुलर एफआईआर में तब्दील करवा सकें।
कैसे काम करता है यह डिजिटल तंत्र?
यह पूरी व्यवस्था तीन प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स – नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और सीसीटीएनएस (CCTNS) के समन्वय से चलती है।
ई-जीरो FIR की प्रक्रिया के 5 मुख्य चरण…
- शिकायत: पीड़ित 1930 हेल्पलाइन या एनसीआर पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करता है। एक लाख से अधिक की धोखाधड़ी का डेटा सीधे भोपाल पुलिस हब पहुंचता है।
- ऑटोमैटिक जनरेशन: सीसीटीएनएस के माध्यम से यह शिकायत स्वतः ही ई-जीरो एफआईआर में बदल जाती है।
- नंबर प्राप्ति: पीड़ित को तुरंत एक ई-जीरो एफआईआर नंबर आवंटित कर दिया जाता है।
- हस्तांतरण: राज्य साइबर पुलिस इस रिपोर्ट को जांच के लिए संबंधित लोकल थाने भेजती है।
- नियमित FIR: पीड़ित को थाने जाकर बयान दर्ज कराने होते हैं, जिसके लिए अब 30 दिन का पर्याप्त समय मिलेगा।
















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