गायकी की दुनिया के सुपरस्टार रहे मोहम्मद रफी के गाने आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं. उन्होंने अपने करियर में 7 हजार से ज्यादा गाने गाए थे, जिसे लोगों का इस कदर प्यार मिला कि रफी साहब हमेशा-हमेशा के लिए लोगों के दिलों बस गए.
रफी का साहब का जन्म 24 दिसंबर 1924 को लाहौर (अब पाकिस्तान का हिस्सा) में हुआ था. साल 1944 में वो मुंबई शिफ्ट हो गए थे और फिर वहीं के होकर रह गए. आज उनकी 101वीं जन्म जंयती है.
ऐसा कहा जाता है कि हजारों गानों को अपनी आवाज देकर अमर करने वाले मोहम्मद रफी ने हज करने के बाद गीत गाना छोड़ दिया था. लेकिन क्या सच में ऐसा है. इसकी सच्चाई एक बार खुद उनके बेटे शाहिद रफी ने बताई थी.
मोहम्मद रफी साल 1970 के आसपास हज यात्रा पर गए थे. बताया जाता है कि वहां किसी मौलाना ने उनसे कहा था कि ये जो आप म्यूजिक में काम करते हैं, इस वजह से आपको बहुत गुनाह होगा. इस बात से रफी साहब काफी डर गए थे. उन्होंने गाना छोड़ दिया था.
इस बारे में एक बार बीबीसी से बात करते हुए उनके बेटे शाहिद रफी ने कहा था, “हां ये सच है. उन्होंने गाना गाना बंद कर दिया था. हालांकि, शुक्र है कि कुछ समय के बाद उन्होंने गाने न गाने का अपना फैसला बदल लिया था और फिर से सिंगिंग में वापस आ गए थे.”
उनके बेटे के इस बात से क्लियर हो जाता है कि मोहम्मद रफी ने गायकी छोड़ी जरूर थी, लेकिन वो ज्यादा समय तक इससे दूर नहीं रह पाए थे और फिर से उन्होंने अपनी आवाज से गानों को अमर करना शुरू कर दिया था.
31 जुलाई 1980 को 55 साल की उम्र में मोहम्मद रफी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. हार्ट अटैक की वजह से उनका निधन हो गया था. वो भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गीत आज भी गुनगुनाए जाते हैं.
















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