उज्जैन. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है. इस खास दिन पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव की कृपा से सुख-समृद्धि और जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है. दरअसल, एक महीने में 2 बार प्रदोष व्रत किया जाता है. इस दिन सुबह से लेकर शाम तक व्रत किया जाता है और भगवान शिव समेत उनके पूरे परिवार की आराधना की जाती है. साथ ही, विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. आइए जानते हैं कि उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से जनवरी का आख़री और माघ मास का आख़री प्रदोष व्रत कब आ रहा है और इसका क्या धार्मिक महत्व है.
कब रखा जाएगा माघ माह का अंतिम प्रड़ोष व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी को दिन में 11 बजकर 09 मिनट से शुरू होगी. इसका समापन 31 जनवरी को सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर होगा. प्रदोष पूजा मुहूर्त के आधार पर जनवरी का अंतिम प्रदोष व्रत 30 जनवरी शुक्रवार को रखा जाएगा. वही पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करे तो, शाम को 5 बजकर 59 मिनट से प्रारंभ है. यह रात को 8 बजकर 37 मिनट तक रहेगा. इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए भक्तों को 2 घंटे 38 मिनट का मुहूर्त प्राप्त होगा.
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 जनवरी को दिन में 11 बजकर 09 मिनट से शुरू होगी. इसका समापन 31 जनवरी को सुबह 8 बजकर 25 मिनट पर होगा. प्रदोष पूजा मुहूर्त के आधार पर जनवरी का अंतिम प्रदोष व्रत 30 जनवरी शुक्रवार को रखा जाएगा. वही पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करे तो, शाम को 5 बजकर 59 मिनट से प्रारंभ है. यह रात को 8 बजकर 37 मिनट तक रहेगा. इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए भक्तों को 2 घंटे 38 मिनट का मुहूर्त प्राप्त होगा.
शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शुक्रवार के दिन पड़ने की वजह से इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन खुशहाली आती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इसके साथ ही जीवन के सभी संकटों से छुटकारा मिलता है. वहीं खासतौर पर इस व्रत को विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए रखती हैं.
शुक्रवार के दिन पड़ने की वजह से इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन खुशहाली आती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इसके साथ ही जीवन के सभी संकटों से छुटकारा मिलता है. वहीं खासतौर पर इस व्रत को विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए रखती हैं.
जरूर करें इन नियमों का पालन
प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्ममुहूर्त में जागकर नित्यकर्म और स्नान से स्वयं को शुद्ध करें. इसके पश्चात भगवान सूर्य को जल अर्पित कर व्रत रखने का संकल्प मन में लें. फिर पूजा स्थल को स्वच्छ कर वहां भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें. शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से विधिवत अभिषेक करें. इसके बाद माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय सहित शिव परिवार की आराधना करें. भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। इसके पश्चात प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण या पाठ करें. पूजा समापन पर भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें. अंत में भोलेनाथ का स्मरण करते हुए ही व्रत का पारण करें.
प्रदोष व्रत के दिन ब्रह्ममुहूर्त में जागकर नित्यकर्म और स्नान से स्वयं को शुद्ध करें. इसके पश्चात भगवान सूर्य को जल अर्पित कर व्रत रखने का संकल्प मन में लें. फिर पूजा स्थल को स्वच्छ कर वहां भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें. शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से विधिवत अभिषेक करें. इसके बाद माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय सहित शिव परिवार की आराधना करें. भगवान भोलेनाथ को बेलपत्र, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करते हुए श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। इसके पश्चात प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण या पाठ करें. पूजा समापन पर भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ अवश्य करें. अंत में भोलेनाथ का स्मरण करते हुए ही व्रत का पारण करें.
जरूर करें इन चीजों का दान
शुक्रवार मां लक्ष्मी और शुक्र देव को समर्पित है. साथ ही शिव जी को भी सफेद रंग की वस्तु प्रिय है, ऐसे में शुक्र प्रदोष व्रत के दिन दूध, दही, सफेद मिठाई, और सफेद वस्त्र दान करने चाहिए, साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, फल, धन और कपड़े दान करें.
शुक्रवार मां लक्ष्मी और शुक्र देव को समर्पित है. साथ ही शिव जी को भी सफेद रंग की वस्तु प्रिय है, ऐसे में शुक्र प्रदोष व्रत के दिन दूध, दही, सफेद मिठाई, और सफेद वस्त्र दान करने चाहिए, साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, फल, धन और कपड़े दान करें.
















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