ऋषभदेव टेकचंद न्यास, खाचरोद
अनैतिकता के विरुद्ध अनशन
धर्म, न्याय और ट्रस्ट संपत्ति की रक्षा का संकल्प
धर्म की संपत्ति की लूट पर मौन क्यों❓
गुरुदेव राजेन्द्र सूरी महाराज साहब के मंदिर परिसर में प्रकाशचंद्रजी ओरा द्वारा प्रारंभ किया गया अनशन किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि खाचरोद के ऋषभदेव टेकचंद न्यास में हो रहे कथित भ्रष्टाचार, विश्वासघात और कानूनी अनियमितताओं के विरुद्ध एक सख्त चेतावनी बताया जा रहा है।
सीधा सवाल❓
यदि न्यासी ही ट्रस्ट की संपत्ति को कमजोर करने, बेचने और किरायेदारों को संरक्षण देने लगें, तो क्या यह अपराध की श्रेणी में नहीं आता?
⚖️ कानूनी तथ्य
ट्रस्ट दो निचली अदालतों से दुकानें खाली कराने के पक्ष में निर्णय जीत चुका है
इसके बावजूद हाईकोर्ट में न तो सक्षम वकील नियुक्त किया गया और न ही प्रभावी पैरवी की गई
आरोप है कि इससे जानबूझकर ट्रस्ट का पक्ष कमजोर किया जा रहा है
➡️ जानबूझकर प्रॉक्सी वकील कराना और किरायेदारों को लाभ पहुंचाना
➡️ IPC 409, 120-B और 420 के अंतर्गत आपराधिक कृत्य माना जा सकता है
🏚️ ट्रस्ट संपत्ति का दुरुपयोग योग्य किराये वाली दुकानों को नाममात्र किराये पर चलवाना ट्रस्ट को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के समान है, जो मध्यप्रदेश पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम के तहत गंभीर लापरवाही है।
📌 कानून स्पष्ट है
दोषी पाए जाने पर न्यासियों को हटाया जा सकता है
आपराधिक प्रकरण और संपत्ति जब्ती तक की कार्रवाई संभव है
✊ यह अनशन केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है
खाचरोद सहित कई क्षेत्रों में ट्रस्ट और मंदिरों की संपत्तियों पर अवैध कब्जों के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। यह मौन अब सवालों के घेरे में है।
👉 यह संघर्ष सही और गलत के बीच खड़ी एक निर्णायक रेखा माना जा रहा है।
अब देखना है कि यह आवाज़ कहाँ तक पहुँचती है…
















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Server Time : June 6, 2026 12:11 pm