उज्जैन. हिंदू सनातन परंपरा में नवरात्रि को अत्यंत पावन और शुभ पर्व माना गया है. नवरात्रि के 9 दिनों में आदिशक्ति मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधिपूर्वक आराधना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वर्ष में कुल चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें शारदीय और चैत्र नवरात्रि प्रसिद्ध हैं जबकि दो नवरात्रि गुप्त रूप से मनाई जाती हैं. गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की 10 महाविद्याओं की साधना विशेष विधि से की जाती है. मान्यता है कि इस गुप्त साधना से भक्तों के जीवन के कष्ट दूर होते हैं और उन्हें माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. आइए जानते हैं उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज से कि गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन किस देवी की पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है.
पंडित आनंद भारद्वाज ने कहा कि वैदिक पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि का आरंभ होता है. प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 जनवरी 2026 दिन सोमवार को दोपहर 01:21 बजे के लगभग हो रही है. वहीं प्रतिपदा तिथि का समापन 20 जनवरी 2026 दिन मंगलवार को दोपहर 02:14 बजे के लगभग हो रहा है. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 19 जनवरी 2026 को होगा.
कैसे प्रसन्न होंगी मां काली?
उन्होंने आगे कहा कि नवरात्रि के पहले दिन मां काली की पूजा का विधान है. मां को गुड़ का भोग बहुत पसंद है. काली मां की पूजा के बाद भोग के गुड़ को गरीबों में बांट देना चाहिए. काली मां को तत्काल प्रसन्न होने वाली और तत्काल ही रूठने वाली देवी माना जाता है. दूसरे दिन मां तारा की पूजा की जाती है.
भगवान बुद्ध ने की थी मां तारा की उपासना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वयं भगवान बुद्ध ने भी मां तारा की उपासना की थी. इतना ही नहीं, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पूज्य गुरु महर्षि वशिष्ठ भी मां तारा की आराधना करने वालों में शामिल थे. शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि महान विद्वान लंकापति रावण और स्वयं देवों के देव महादेव ने भी मां तारा की शरण ग्रहण की थी. मां तारा की पूजा हमेशा रात के समय करनी चाहिए. मां तारा की पूजा हमेशा एकांत में करनी चाहिए. माता को नीले रंग के वस्त्र और पुष्प अर्पित करें. मां तारा को प्रसाद के रूप में आम चढ़ाएं.
मां तारा की पूजा का महत्व
मां तारा को धन, वैभव और ऐश्वर्य प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है. 10 महाविद्याओं में उनका स्थान दूसरा माना गया है. शास्त्रों के अनुसार मां तारा देवी पार्वती का ही एक दिव्य स्वरूप हैं. उनकी उपासना न केवल हिंदू धर्म में बल्कि बौद्ध परंपरा में भी विशेष महत्व रखती है. मान्यता है कि मां तारा की आराधना से साधक को सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है.
















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