खैरागढ़ : खैरागढ़ जिले के घाघरा गांव स्थित बटालियन कैंप में जवान की गोली लगने से हुई मौत के मामले में पुलिस प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। यह घटना न केवल सुरक्षा बलों के भीतर अनुशासन और आपसी समन्वय पर सवाल खड़े करती है बल्कि कैंप के अंदर पनप रहे आंतरिक तनाव को भी उजागर करती है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश कुमार गौतम ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि 21 तारीख की रात गातापार थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि घाघरा कैंप परिसर में एक जवान की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू की गई।
एडिशनल एसपी के अनुसार मृतक जवान की पहचान सोमवीर सिंह उर्फ सोनवीर जाट के रूप में हुई है, जबकि आरोपी जवान आरक्षक अरविंद गौतम है। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि दोनों जवानों के बीच पहले से दोस्ताना संबंध थे और वे एक ही कैंप में साथ तैनात थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि घटना वाले दिन शाम के समय किसी मामूली बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हो गया था। विवाद के दौरान मृतक जवान द्वारा आरोपी को थप्पड़ मारे जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इसी घटना को लेकर आरोपी के मन में नाराजगी और द्वेष उत्पन्न हो गया, जो बाद में एक गंभीर और घातक वारदात में बदल गया।
पुलिस ने बताया कि घटना की रात आरोपी आरक्षक अरविंद गौतम पेट्रोलिंग ड्यूटी पर तैनात था। ड्यूटी के दौरान रात करीब 12 बजे उसने अपनी इंसास राइफल से एक राउंड फायर किया। गोली पहले मृतक जवान के हाथ को चीरती हुई उसके चेहरे पर जा लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। फायरिंग की आवाज सुनते ही कैंप में हड़कंप मच गया और अफरा तफरी का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर आरोपी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपी को गिरफ्तार कर गातापार थाना में सुरक्षित रखा गया है।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना में प्रयुक्त हथियार, ड्यूटी से संबंधित दस्तावेज, पेट्रोलिंग रिकॉर्ड और अन्य भौतिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन विवेचना की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यों के आधार पर की जा रही है तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
यह घटना बटालियन कैंप की आंतरिक अनुशासन व्यवस्था, जवानों के बीच तनाव प्रबंधन और मनोवैज्ञानिक निगरानी जैसे मुद्दों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। अब जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस दुखद घटना के लिए जिम्मेदारी किस स्तर तक तय की जाती है और आगे क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।
















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