भोपाल। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर पथ विक्रेताओं के लिए पीएम स्वनिधि योजना-2.0 शुरू की गई, ताकि वे बैंक से ऋण लेकर स्वरोजगार स्थापित कर सकें। लेकिन पथ विक्रेताओं को लोन देने में बैंक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यही वजह है कि पीएम स्वनिधि योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश के पथ विक्रेताओं द्वारा बैंकों में लोन के लिए किए गए 17 लाख 60 हजार 100 आवेदनों में से एक लाख 89 हजार 185 आवेदन लौटा दिए गए।
जो 14 लाख 67 हजार 843 आवेदन स्वीकार किए गए, उनमें भी 1,00,012 को मंजूरी नहीं दी गई है और 32,034 लोन वितरण लंबित है। हालांकि 14 लाख 35 हजार 809 आवेदनों में बैंकों से लोन वितरण हुआ है।
इधर, प्रदेश के 11 जिले ऐसे हैं, जहां पीएम स्वनिधि योजना की स्थिति बेहद खराब है। यहां बैंकों ने 52,574 आवेदन लौटा दिए हैं। जिसके चलते अब छोटे व्यापारियों की दिलचस्पी इस योजना में नहीं रह गई है, जबकि इसकी राशि में भी इजाफा कर दिया गया है। पहली बार में दस के स्थान पर अब 15 हजार दिए जा रहे हैं और दूसरी बार में 20 के स्थान पर 25 हजार है।
इन 10 जिलों में योजना की स्थिति बेहतर
बैतूल, आगर मालवा, हरदा, रतलाम, मंदसौर, बड़वानी, रीवा, पांढुर्णा, सतना और छिंदवाड़ा जिले में पीएम स्वनिधि योजना के तहत पथ विक्रेताओं को बैंकों से 99.50 प्रतिशत से लेकर 83.79 प्रतिशत लोन के आवेदन स्वीकृत किए गए हैं।
आवश्यक दस्तावेज पूरे नहीं होने पर आवेदन लौटा दिए जाते हैं
कुछ प्रकरणों में व्यक्ति नहीं पहुंचता है तो कुछ प्रकरणों में लोन के लिए आवश्यक दस्तावेजों पूरी नहीं होते हैं। इस स्थिति में बैंकों द्वारा ऐसे आवेदनों लौटा दिए जाते हैं। मप्र में स्थिति बेहतर है, पीएम स्वनिधि योजना में 75 प्रतिशत प्रकरणों में बैंकों ने लोन दिया है। समय-समय पर इस प्रकरणों की समीक्षा की जाती है और बैंकों को निर्देश दिए जाते हैं कि वे सत प्रतिशत प्रकरणों में लोन स्वीकृत करें।
















Users Today : 7
Total Users : 17635
Views Today : 7
Total views : 30858
Who's Online : 0
Server Time : June 26, 2026 11:01 am