ग्वालियर। बालिका के साथ दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एकादशम अपर सत्र विशेष न्यायालय पाक्सो एक्ट ग्वालियर के न्यायाधीश तरुण सिंह ने आरोपित रिंकू वाल्मीक पुत्र रतीराम को दोषी माना और आजीवन कारावास व 25 हजार रुपये के अर्थदंड दिया है। अर्थदंड न चुकाने पर एक वर्ष का सश्रम कारावास अलग से भुगतना होगा।
इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रसन्न यादव ने पैरवी की। घटना की रिपोर्ट पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह (भापुसे) के निर्देशन में थाना सिरोल पुलिस ने त्वरित व संवेदनशील कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार किया और पाक्सो एक्ट के तहत चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया।
अपराध की गंभीरता देखते हुए दोष सिद्ध हुए
न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि यद्यपि सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां अपने बयानों से मुकर गई थीं, लेकिन थाना सिरोल पुलिस द्वारा संकलित ठोस साक्ष्य, परिस्थितिजन्य तथ्य और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपित पर दोष सिद्ध हुआ है।
न्यायाधीश ने पीड़िता पर पड़े शारीरिक व मानसिक प्रभाव, उसके भविष्य और मनोवैज्ञानिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को निर्देश दिए कि पीड़िता को प्रतिकर स्वरूप दो लाख रुपये की राशि नियमानुसार दिलाई जाए। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपित का सजा वारंट तैयार कर उसे दंड भुगतने के लिए केंद्रीय जेल ग्वालियर भेज दिया गया।
यह है घटना
27 मई 2025 को फरियादिया निवासी घाटीगांव, हाल निवासी थाना सिरोल क्षेत्र ग्वालियर ने थाना सिरोल में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। फरियादिया ने बताया कि दोपहर के समय उसकी नाबालिग बेटी और बेटा बाहर खेल रहे थे। कुछ देर बाद जब बेटी दिखाई नहीं दी तो तलाश की गई। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले रिंकू वाल्मीक पुत्र रतीराम के घर में झांककर देखा तो बच्ची उसके साथ मौजूद थी। जब मां ने बेटी से पूछताछ की तो उसने बताया कि उस व्यक्ति ने उसके साथ गलत काम किया। इसी आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित के विरुद्ध कार्रवाई की।
















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