भोपाल। सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन में शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर 30 किमी लंबे घाट बनाए जा रहे हैं। इनका निर्माण दिसंबर 2027 तक पूरा हो जाएगा। घाटों में हर दिन पांच करोड़ लोग स्नान कर सकेंगे। घाट बनाने के लिए 12.71 हेक्टेयर सरकारी और 36.99 हेक्टेयर निजी भूमि अधिगृहीत की गई है।
सिंहस्थ से संबंधित सभी कार्यों पर दो हजार 396 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। यह बात जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने मंगलवार को भोपाल में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियां बताते हुए कही। उन्होंने कहा कि शिप्रा को निर्मल बनाने के लिए उज्जैन जिले की कान्ह नदी का पानी इसमें लाया जाएगा, जिस पर 919 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
मंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो के सपने को साकार करने का कार्य प्रारंभ हुआ है। देश की पहली नदी जोड़ो केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत दौधन बांध का निर्माण प्रारंभ हो चुका है। 22 प्रभावित ग्रामों के भू-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन के लिए अवार्ड पारित हो गया है।
दूसरी महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजना है संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक है, इससे प्रदेश के बड़े हिस्से में सिंचाई, पेयजल, उद्योगों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा। तीसरी तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना विश्वभर में अपने आप में अनूठा प्रयास है। इसमें वर्षा के दौरान तापी नदी के अतिरिक्त जल को नियंत्रित तरीके से उपयोग कर भू-जल स्तर में वृद्धि की जाएगी। यहां विभाग के अपर मुख्य सचिव डा. राजेश राजौरा भी उपस्थित थे।
ड्रिप परियोजना से बांधों की होगी मरम्मत
बांधों की सुरक्षा के लिए बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 के प्रविधानों को लागू करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने वाला मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य है। ड्रिप परियोजना के अंतर्गत आगामी पांच वर्षों में 27 बांधों की मरम्मत के कार्य कराए जाएंगे। विश्व बैंक ने इसके लिए 186 करोड की स्वीकृति दी है, जिनमें तीन बांधों पर कार्य प्रारंभ हो गया है।
















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