भोपाल। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय पीठ, भोपाल ने शहर के कबाड़खाना क्षेत्र में संचालित अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग इकाइयों पर सख्त रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 50 से अधिक इकाइयों को आवासीय क्षेत्रों से बाहर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी ने माना है कि इन गतिविधियों से गंभीर पर्यावरणीय प्रदूषण और जनस्वास्थ्य को खतरा पैदा हो रहा है।
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2022 से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद शहर में इसका खुलेआम उपयोग जारी है। प्रतिदिन 10 से 12 टन प्लास्टिक कचरा नगर निगम के ट्रांसफर स्टेशनों और आदमपुर छावनी तक पहुंच रहा है। इसके अलावा लगभग इतनी ही मात्रा अनौपचारिक कबाड़ी नेटवर्क के जरिए कबाड़खानों में पहुंचकर अवैध रूप से रीसायकल की जा रही है। ट्रिब्यूनल ने इसे नियमों का खुला उल्लंघन बताया है।
ई-वेस्ट का अवैध विघटन चिंता का विषय
एनजीटी ने यह भी गंभीर चिंता जताई कि कबाड़खाना क्षेत्रों में ई-वेस्ट का बड़े पैमाने पर अवैध विघटन हो रहा है। कीमती धातुएं निकालने के लिए ई-वेस्ट को जलाया जाता है, जिससे जहरीली गैसें निकलती हैं और आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है। संकरी गलियों में संचालित इन फैक्ट्रियों के आसपास करीब दो लाख की आबादी निवास करती है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां सप्ताह में दो बार आग लगने की घटनाएं भी सामने आती हैं।
प्रदूषण स्तर बेहद खतरनाक
अध्ययन में इस क्षेत्र में पीएम-10 का स्तर 225 तक दर्ज किया गया है, जो इसे शहर के सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल करता है। एनजीटी ने मल्टी लेयर्ड प्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक के बढ़ते खतरे पर भी चिंता जताई है और इस पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
चार सप्ताह में रिपोर्ट तलब
ट्रिब्यूनल ने मध्यप्रदेश सरकार, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भोपाल नगर निगम के साथ-साथ इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा और उज्जैन नगर निगमों को चार सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च 2026 को होगी।
















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