हरदा। जिले की ग्राम पंचायत पलासनेर से शनिवार शाम एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और पंचायत राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायत सचिव ओमप्रकाश गुर्जर की ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने हार्ट अटैक से मौत की पुष्टि की। रविवार सुबह जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
जांच का दबाव, तनाव और अचानक मौत
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पंचायत में चल रही लगातार जांचों और शिकायतों के चलते सचिव ओमप्रकाश गुर्जर पिछले लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। शनिवार को भी जांच टीम की मौजूदगी और पूछताछ के दौरान उन पर दबाव बढ़ा, जिसके कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। देखते ही देखते यह ड्यूटी मौत में बदल गई।
ग्रामीणों और पंचायत पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप
घटना के बाद पंचायत और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया। सरपंच संघ और सचिव संघ ने एसडीएम संजीव कुमार नागु को ज्ञापन सौंपते हुए सीधे तौर पर उपसरपंच सहित कुछ ग्रामीणों और पंचायत पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सरपंच संघ का आरोप है कि इस मानसिक प्रताड़ना को लेकर पहले भी वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन किसी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा यह हुआ कि एक जिम्मेदार कर्मचारी ड्यूटी करते-करते अपनी जान गंवा बैठा।
7 लोगों पर कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावनी
अब संघ ने इस मामले में उपसरपंच सहित सात लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन और कार्य बहिष्कार जैसे कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
सवाल जो सिस्टम से पूछे जा रहे हैं
क्या लगातार झूठी शिकायतें भी एक तरह की हिंसा नहीं हैं? क्या प्रशासनिक जांच का दुरुपयोग कर किसी कर्मचारी को मानसिक रूप से तोड़ा जा सकता है? और अगर हां, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
















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