भारतीय रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल (DAC) 23 नवंबर को महत्वपूर्ण रक्षा सौदों पर चर्चा करेगी. इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे. इनमें सेना के लिए रॉकेट लॉन्चर, नौसेना और वायुसेना के लिए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (MR-SAM) और चार स्वदेशी लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD) जहाज़ों की 33,000 करोड़ रुपये की बड़ी डील शामिल है.
बैठक में मुख्य रक्षा अध्यक्ष (CDS) जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद रहेंगे. इससे पहले डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड (DPB), जिसकी अध्यक्षता रक्षा सचिव आर.के. सिंह कर रहे हैं, इन सभी सौदों को मंज़ूरी दे चुका है. ये सभी प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत के तहत देश में ही विकसित हथियार प्रणालियां हैं.
MR-SAM मिसाइलें: भारतीय नौसेना और वायुसेना, दोनों को Bharat Dynamics द्वारा निर्मित MR-SAM (Medium Range Surface to Air Missile) मिलने वाली हैं. 100 किलोमीटर रेंज वाली यह मिसाइल प्रणाली दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है. दोनों सेनाओं को 300 से अधिक मिसाइलें मिलने की संभावना है.
पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL): DRDO द्वारा विकसित पिनाका रॉकेट सिस्टम, जिसकी रेंज लगभग 90 किलोमीटर है, अब भारतीय सेना को दिए जाने की तैयारी है. इस बैठक में लगभग 1000 पिनाका रॉकेट्स को मंज़ूरी दिए जाने की संभावना है.
सेना के एयर डिफेंस वाहन: सेना ने कमांड और कंट्रोल उपकरणों के लिए विशेष वाहनों की मांग की है, जो इस बैठक के एजेंडा में शामिल है. यह प्रणाली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान से हुए संघर्ष में बेहद प्रभावी साबित हुई थी.
लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक (LPD): सबसे बड़ा सौदा चार LPD जहाज़ों का है, जिनका वजन 20,000 टन से अधिक होगा यानी लगभग छोटे एयरक्राफ्ट कैरियर जितना. इनकी कीमत 33,000 करोड़ रुपये तक होगी. यह सौदा देश के शिपबिल्डिंग सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन देगा.
LPD जहाज़ आमतौर पर अम्फ़िबियस वॉरफेयर यानी समुद्र और ज़मीन दोनों पर अभियान के लिए उपयोग होते हैं, लेकिन इन्हें सप्लाई शिप के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. क्योंकि यह एक बड़े वित्तीय पैमाने का सौदा है, इसलिए अंतिम मंज़ूरी के लिए इसे कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) को भेजा जाएगा.
पहले चर्चा थी कि DAC की बैठक 23 अक्टूबर को होगी, लेकिन उसी दिन नेवल कमांडर्स कॉन्फ्रेंस भी निर्धारित थी. अब निर्णय लिया गया है कि दोनों अहम बैठकें दीवाली के बाद, 23 नवंबर को आयोजित की जाएंगी.
भारत की तीनों सेनाओं को मिलने जा रहे ये हथियार सिस्टम न केवल उनकी मारक क्षमता और गतिशीलता को बढ़ाएंगे, बल्कि देश के रक्षा निर्माण उद्योग को भी एक नई गति देंगे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में यह एक बड़ा कदम होगा.
















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