लोकेशन आगर मालवा।
रिपोर्ट जावेद खान
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स्वास्थ्य व्यवस्था शर्मसार! जिला अस्पताल में डिलीवरी के नाम पर मौत का खेल, महिला चिकित्सक की लापरवाही से मां-बच्चे की गई जान, परिजनों का फूटा आक्रोश…
आगर मालवा मध्यप्रदेश- जिला अस्पताल एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। यहां डिलीवरी के लिए लाई गई एक गर्भवती महिला और उसके नवजात की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस हृदयविदारक घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि सरकारी अस्पतालों में मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत भी उजागर कर दी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बड़ागांव निवासी यास्मीन पति इक़बाल (31 वर्ष) को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पदस्थ महिला चिकित्सक डॉ. शीतल मालवीय द्वारा डिलीवरी कराई गई, लेकिन इस दौरान आवश्यक सावधानियां और समय पर उपचार नहीं किया गया। परिजनों का कहना है कि डिलीवरी के दौरान लापरवाही बरती गई, जिससे पहले नवजात की और उसके बाद महिला की मौत हो गई। मां और बच्चे की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। घटना की जानकारी मिलते ही एनएसयूआई के राष्ट्रीय महासचिव अंकुश भटनागर भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने कहा कि यह सीधा-सीधा चिकित्सकीय लापरवाही का मामला है और दोषी डॉक्टर के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं दूसरी ओर महिला चिकित्सक डॉ. शीतल मालवीय ने थाना प्रभारी को दिए गए अपने आवेदन में आरोपों से इंकार किया है। उनका कहना है कि डिलीवरी से पहले ही गर्भ में शिशु की मृत्यु हो चुकी थी, जबकि महिला की मौत बाद में हुई। चिकित्सक के अनुसार उपचार नियमानुसार किया गया और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन हरकत में आया है। प्रभारी सिविल सर्जन विजय सागरिया ने बताया कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मां और नवजात की मौत से जिले भर में आक्रोश का माहौल है। परिजन न्याय की मांग पर अड़े हुए हैं और आमजन यह सवाल उठा रहा है कि आखिर जिम्मेदारों पर कब तक कार्रवाई होगी और कब सुधरेगी सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था।

















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Server Time : July 27, 2026 11:00 am